शनिवार, 10 जनवरी 2015

शिशुगीत - २

२६. रबर










गलत लिखे को तुरंत मिटा दे
कॉपी मेरी रखता साफ
गुस्सा होने से ही पहले
टीचर कर देते हैं माफ

२७. दूध













मम्मी बोले दूध पियो
लेकिन मुझे नहीं भाता
इधर-उधर जाकर घर में
मैं हरदम ही छिप जाता
मम्मी ढूँढ ही लेती है
बूस्ट मिलाकर देती है

२८. बल्ब













कमरे में ये भरे उजाला
छोटा सूरज-चाँद निराला
रोज शाम को जलता है
जब-जब सूरज ढलता है

२९. घड़ी













टेबलपर बैठी रहती
सबको समय बताती है
सुबह-सुबह ये बज-बजकर
मुझको रोज उठाती है

३०. टॉर्च











जैसे ही बिजली जाती
हमसब टॉर्च जलाते हैं
कैंडिल, माचिस ढूँढते
डर को दूर भगाते हैं

5 टिप्‍पणियां:

  1. इसे मैं एक स्कूल से निकलने वाली पत्रिका के लिए लूं ? क्या ?

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    1. जी जरूर विभा मैम....हार्दिक आभार आपका....

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    2. मेरी रचना मेरे नाम के साथ स्कूलों में पढाई जाये ये तो अभूत ख़ुशी की बात है मेरे लिए.....

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  2. sundar pyari rachna ..ajkal bachcho ke liye kam hi log likhte hai :)

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