शुक्रवार, 14 नवंबर 2014

प्यारी-प्यारी चुहिया रानी - बाल कविता

प्यारी-प्यारी चुहिया रानी
नटखट सी पर बड़ी सयानी
पल में निकले, हाथ दिखाए
पलभर में जाकर छिप जाए
सारे-सारे दिन बतियाती
न्यारे-न्यारे बोल सुनाती
रूठूँ मैं तो दौड़ मनाए
कभी-कभी खुद भी खिसियाए
बड़ा जरूरी इसका होना
सजता घर का कोना-कोना
भोली-भाली सच्ची है
हँसती लगती अच्छी है

(चित्र नेट से साभार)

2 टिप्‍पणियां: