शनिवार, 31 मई 2014

क्यूट-क्यूट है दोस्त हमारी - बाल कविता

बिल्कुल इस गुड़िया के जैसी 
क्यूट-क्यूट है दोस्त हमारी
जब हम कोई खेल खेलते
देती मुझको अपनी बारी

कभी न लड़ती, सदा किलकती
बस खुशियाँ ही बरसाती है
मीठी-मीठी बोली इसकी
हरदम ही दिल को भाती है

थोड़ी नटखट लेकिन अच्छी
आलू टिक्की मन से खाती
शरारतों का मूड चढ़े तो
लाइट बुझा घर में छिप जाती

कुची-कुची हैं गाल टमाटर
आँखें कितनी भोली-भाली
मन करता है इसे खिलाऊँ
रोज मिठाई भर-भर थाली

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