गुरुवार, 15 मई 2014

हाइकु गीत - आप हमारे

मस्त नजारे
नभ, चाँद-सितारे
आप हमारे

स्वप्न सजे हैं
दिल झूम उठा है
साज बजे हैं
प्रीत लगायी
धड़कन लौटायी
बने सहारे

जीवन जागा
अब हुआ उजाला
तम है भागा
ऋतु बासंती
कोयल मदमाती
हमें दुलारे

साँसें महकीं
हैं भाव हुलसते
आँखें बहकीं
बाग-बगीचे
तितली इठलाती
लगते प्यारे

8 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. बहुत-बहुत आभार आदरणीया मोनिका जी

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    1. सादर आभार आपका आदरणीया प्रीति जी

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  3. एक बादल
    ऐसे घिर आया है
    कि आँखों में
    भर आया है
    वाह , बहुत खूब। हाइकू लिखना मुझे हमेशा से प्रभावित करता है. बहुत अद्भुद विधा है ये। कभी लिख नहीं पाया मगर शायद आपकी रचनाएँ पढ़कर कुछ सीख सकूँ। बहुत सुन्दर रचना. बहुत बहुत बधाई और आभार

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    1. बहुत-बहुत स्वागत आपका आदरणीय अखिल जी, आभार

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  4. ajitendu!
    prasann rahie. achchha prayas. 'rut' galat hai 'ritu' karen. antare men samtumant 2-2 haiku hon to lalitya men vriddhi hogi. aaj haiku ke shilp par ek lekh taiyar kar raha hoon. haiku salila men dekhiye. raat tak lag sakega.

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    1. हार्दिक स्वागत आपका आदरणीय आचार्य जी, स्नेह एवं प्रोत्साहन हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद आपका, आपके परामर्श के अनुसार संशोधन कर दिया है

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