शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

गप्पू बंदर - बाल कविता (चौपई छंद)














गप्पू बंदर था बदमाश
काम एक था उसका खास
चुरा-चुरा के खाता आम
करता औरों को बदनाम

सब पशुओं ने की तब राय
मिलकर सोचा एक उपाय
गधा कैमरा लाया भाग
उसे लगाया फल के बाग

गप्पू जब आया उस रात
उसको पता न थी ये बात
हुई रिकॉर्डिंग, गप्पू चोर
कह दौड़े सब उसकी ओर

जम के पड़ी, खिंचाये कान
सुधर गया गप्पू शैतान
अगले दिन ही खोली शॉप
लगा बेचने आलू चॉप

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