सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

गीत - तन्हाई से बढ़के कोई

जब-जब रोया हूँ जीवन में
गले लगाया, दिया सहारा
तन्हाई से बढ़के कोई
और नहीं है मीत हमारा

साथ निभाती है ये हरदम
नित पलकों तले बिठाती है
वफा इसी की सोने जैसी
ना झूठी कसमें खाती है
विह्वल हो जाती मेरे बिन
कर ना पाती तनिक गुजारा

शब्दों में जादू है इसके
जख्मों का मरहम बन जाती
प्रिया, प्रेयसी ये ही मेरी
दिखा अदाएं दिल बहलाती
संग बुला लेती सपनों में
लगती माँझी, नाव, किनारा

दगाबाज तो मैं हूँ यारों
बार-बार है इसे रुलाया
क्षमाशील ये बड़े हृदय की
सबकुछ इसने सदा भुलाया
बाँहें फैला पल-पल इसने
बड़े प्यार से मुझे पुकारा

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