मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

महाशिवरात्रि पर विशेष





















रक्षा की ब्रह्मांड की, किया गरल का पान।
शरण हमें भी दिजिए, हे शंकर भगवान।
आदिदेव हैं आप ही, नाथों के हैं नाथ,
त्राण दिलाता कष्ट से, नित्य आपका ध्यान॥

भारतीय सेना के सम्मान में एक घनाक्षरी



















जीभ रक्त माँगती है भारती के शत्रुओं का, नैनों में भरा प्रचंड तेज और ज्वाल है।
वज्र के समान देह, थाम लेते आँधियों को, साँस-साँस चक्रवात सी ही विकराल है।
शूर हैं महान, विश्व धाक मानता सदैव, शोभता गले में नित्य जीत का जो माल है।
ओजवान, शक्तिवान, वीर्यवान, धैर्यवान, हैं इन्हीं के कर्म जो तना हमारा भाल है॥

गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

आशुनिकुञ्ज सवैया - आया भालू (बाल रचना)





























(चित्र नेट से साभार)

गीत - साँसों की ये गर्म हवाएं

साँसों की ये गर्म हवाएं
सारा दिन बतियाती हैं

खंडहरों से नोंच-नोंचकर
कभी पुराने किस्से लातीं
कभी समंदर तल में मचती
उथल-पुथल का हाल सुनातीं
नहीं सुनी जिसदिन भी इनकी
रात स्वप्न में आती हैं

राहों से अनजान स्वयं हैं
मददगार लेकिन बन जातीं
महक अनुभवों की लाकर ये
काफी कुछ आसान बनातीं
देख पड़ावों को जाने क्यों
अर्थ भरे मुस्काती हैं

अपनी सी महसूस हुईं तो
कभी परायापन भी छलका
दोनों ही भावों से अक्सर
नयनों से पानी है ढलका
वैसे में इनसे जो बनता
आकर खुद समझाती हैं

सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

गीत - तन्हाई से बढ़के कोई

जब-जब रोया हूँ जीवन में
गले लगाया, दिया सहारा
तन्हाई से बढ़के कोई
और नहीं है मीत हमारा

साथ निभाती है ये हरदम
नित पलकों तले बिठाती है
वफा इसी की सोने जैसी
ना झूठी कसमें खाती है
विह्वल हो जाती मेरे बिन
कर ना पाती तनिक गुजारा

शब्दों में जादू है इसके
जख्मों का मरहम बन जाती
प्रिया, प्रेयसी ये ही मेरी
दिखा अदाएं दिल बहलाती
संग बुला लेती सपनों में
लगती माँझी, नाव, किनारा

दगाबाज तो मैं हूँ यारों
बार-बार है इसे रुलाया
क्षमाशील ये बड़े हृदय की
सबकुछ इसने सदा भुलाया
बाँहें फैला पल-पल इसने
बड़े प्यार से मुझे पुकारा