सोमवार, 15 दिसंबर 2014

लजीज दोहे

हलवा, पूरी, रायता, लड्डू, मटर-पनीर।
सत्तू भरी कचौरियाँ, मेवेवाली खीर॥

आलू-पालक, राजमा, चावल, दही, अचार।
प्याज पकौड़े, पापड़ी, दाल मसालेदार॥

आलूचॉप, दहीबड़ा, लस्सी, सूप, पुलाव।
पानीपूरी चटपटी, बुंदिया, बड़ापाव॥

लिट्टी-चोखा, मिर्च, घी, रोटी, पालक-साग।

बुधवार, 24 सितंबर 2014

देखो फिर नवरात्रि आये (माता भजन एल्बम)

कुमुद भूषण की भक्तिमय प्रस्तुति


देखो फिर नवरात्रि आये

(भजन डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स को क्लिक करें)

naudin navratron ke.mp3

jagrata sherawali ka.mp3

aaja maiya aaja.mp3

ghabra nahin ab tu khada.mp3

mata tere charnon mein.mp3

dekho fir navratri aaye.mp3

jai durga dukh harnewali.mp3

aarti karun maa jagdamba ki.mp3


स्वर - कुमार सौरभ दिब्येन्दु (08083880819)

गीतकार - कुमार गौरव अजीतेन्दु

सोमवार, 1 सितंबर 2014

गीतिका का तानाबाना - ओम नीरव

प्रस्तावना - ग़ज़ल एक काव्य विधा है जिसका प्रयोग किसी भी भाषा में किया जा सकता है ! इसलिए ग़ज़ल विधा को उर्दू की सीमित परिधि से बाहर निकालकर विस्तार देने के लिए हिंदी में ग़ज़ल लेखन को प्रोत्साहित करना आवश्यक है l बहती सरिता का जल निर्मल रहता है जबकि ठहरे हुए पोखर का जल सड़ने लगता है इसलिए ग़ज़ल को विस्तार देना अपरिहार्य है , 'ग़ज़ल को ग़ज़ल ही रहने देना' उचित नहीं है l
हिंदी भाषा और हिन्ही व्याकरण में लिखी ग़ज़ल को एक अलग नाम 'गीतिका' देने की भी आवशयकता है , इससे जहां एक ओर उर्दू ग़ज़ल का मौलिक स्वरुप अक्षुण्ण रहेगा , वहीँ दूसरी ओर 'गीतिका' को भी एक स्वतंत्र विधा के रूप में सम्मान से देखा जा सकेगा !
गीतिका एक हिंदी छंद का नाम भी है किन्तु यह संयोग मात्र है , उस छंद से इस 'गीतिका' का कोई साम्य  नहीं है ! मेरी जानकारी के अनुसार इस परिप्रेक्ष्य में 'गीतिका' शब्द का प्रयोग सर्व प्रथम राष्ट्रीय कवि पद्म श्री गोपाल दास नीरज जी के द्वारा किया गया था ! अस्तु 'गीतिका' की प्रस्तुत अभिधारणा श्रद्धेय नीरज जी को साभार सप्रेम समर्पित है !

गीतिका की मुख्य अभिधारणाएं निम्नवत हैं --


शुक्रवार, 30 मई 2014

मुक्त उड़ान-हाइकु के क्षेत्र में एक नया हस्ताक्षर कुमार गौरव अजीतेन्दु - समीक्षा - ऋता शेखर 'मधु'

मेरे प्रथम हाइकु संकलन "मुक्त उड़ान" की समीक्षा आदरणीया ऋता दी के द्वारा.......



मुक्त उड़ान-हाइकु के क्षेत्र में एक नया हस्ताक्षर कुमार गौरव अजीतेन्दु

शुक्तिका प्रकाशन, कोलकाता द्वारा प्रकाशित हाइकु संग्रह 'मुक्त उड़ान' पढ़ने को मिली| यह युवा हाइकुकार कुमार गौरव अजीतेन्दु जी का एकल हाइकु संग्रह है| पुस्तक के नाम के अनुसार हाइकु परिंदों ने सचमुच में मुक्त उड़ान लगाई है| हर भाव, हर क्षेत्र, हर परिस्थिति , हर उम्र के हाइकु चुनकर लाए हैं अजीतेन्दु के भाव परिंदों ने| पुस्तक का मूल्य मात्र १००/- है| भूमिका के रूप में अपना आशीष भरा हाथ तरुण हाइकुकार के सिर पर रखा है उत्कृष्ट साहित्यकार आचार्य संजीव वर्मा सलिल जी ने| पूरे ५०० हाइकु वाली पुस्तक पढ़ते हुए मैं कई स्थानों पर स्तब्ध रह गई अजीतेन्दु की परिपक्व सोच पर| कहते हैं न कि युवा पीढ़ी में असीम संभावनाएँ होती हैं वह नवहाइकुकार की रचनाओं में प्रत्यक्ष प्रतीत होती है| अवलोकन करते हैं उनके हाइकु काव्यों का जो आपको भी अचंभित किए बिना न रहेंगे|

कोई भी अनजानी राह पर पथिक का डरा हुआ मन ऐसे ही बोलेगा|


पुस्तक परिचय - मुक्त उड़ान (हाइकु संकलन)






















पुस्तक :  मुक्त उड़ान

विधा : हाइकु (500 हाइकु संकलित)

प्रकार : पेपरबैक

पृष्ठ : 108

संस्करण : प्रथम

मूल्य : 100/- रुपये (कोई डाकखर्च नहीं)

लेखक : कुमार गौरव अजीतेन्दु

भूमिका : आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"

आईएसबीएन : 978-81-925946-8-2

प्रकाशक : शुक्तिका प्रकाशन, कोलकाता

पुस्तक मँगवाने के लिए संपर्क करें :

सुरेश कुमार चौधरी
शुक्तिका प्रकाशन, 508 न्यू अलीपुर मार्केट कॉम्प्लेक्स
न्यू अलीपुर, कोलकाता - 700053
मोबाइल: 09830010986
ईमेल: skchoudhary2005@gmail.com