रविवार, 3 नवंबर 2013

नया-नवेला चिड़ा सुहाना (बाल कविता)














नया-नवेला चिड़ा सुहाना
फैशनबाजी का दीवाना
हरा गॉगल्स, टोपी नीली
चोंच क्यूट सी, पीली-पीली
पैदा होते "हैल्लो" बोला
लगा गटकने कोका कोला
पाँव घोंसले से ना निकले
नटखट मन-दिल जाते फिसले
शरारती होगा ये पक्का
रख देगा कर हक्का-बक्का
मचाएगा ऐसी शैतानी
याद आएगी दादी-नानी

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