मंगलवार, 22 अक्तूबर 2013

गीत - किरण दिखी है इक आशा की
















किरण दिखी है इक आशा की।

दुनिया में भारत का परचम एकबार फिर लहराएगा,
होंठ-होंठ मुस्कान सजेगी, धुंध छँटेगी हर बाधा की।
किरण दिखी है इक आशा की।

भूखा सोएगा ना कोई भी पीकर प्याले आँसू के,
सपने भी सच होंगे सारे, राह सजेगी अभिलाषा की।
किरण दिखी है इक आशा की।

कमल खिलेगा सदभावों का सभी दिलों के तालाबों में,
मंदिर होगा देश हमारा औ' पूजा भारतमाता की।
किरण दिखी है इक आशा की।

सफल नहीं हो पाएंगी अब चालें घर के गद्दारों की,
जगह नहीं होगी नफरत की ना नफरतवाली भाषा की।
किरण दिखी है इक आशा की।

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