मंगलवार, 22 अक्तूबर 2013

कविता - राष्ट्रवाद का अनुयायी है

















राष्ट्रवाद का अनुयायी है, राष्ट्रप्रेम की अलख जगाता।
भारतहित में सदा समर्पित, भारतमाता को नित ध्याता॥

साधारण परिवार में जन्मा, पर साधारण नहीं तेज है।
कंटकमय पथ को भी वो कर देता श्रम से पुष्प-सेज है॥

अविवाहित जीवन को चुनकर, लिया देश की सेवा का व्रत।
संघ समान शक्ति से जुड़कर, हुआ महान कर्म, तप में रत॥

अनुपम वक्ता, मधुर, मनोहर वाणी से जीत हृदय लेता।
बना प्रेरणा नवयुवकों की, नवरस जन-जन में भर देता॥

आज भयानक अँधियारे में, दीपक जैसा दीख रहा है।
देख उसे अविजित, मन सबका तम से लड़ना सीख रहा है॥

जगा रहा है हमें निरन्तर, आओ आहुति तुम भी डालो।
भटक रहा है राष्ट्र मार्ग से, सारे मिलकर इसे सँभालो॥

गीत - किरण दिखी है इक आशा की
















किरण दिखी है इक आशा की।

दुनिया में भारत का परचम एकबार फिर लहराएगा,
होंठ-होंठ मुस्कान सजेगी, धुंध छँटेगी हर बाधा की।
किरण दिखी है इक आशा की।

भूखा सोएगा ना कोई भी पीकर प्याले आँसू के,
सपने भी सच होंगे सारे, राह सजेगी अभिलाषा की।
किरण दिखी है इक आशा की।

कमल खिलेगा सदभावों का सभी दिलों के तालाबों में,
मंदिर होगा देश हमारा औ' पूजा भारतमाता की।
किरण दिखी है इक आशा की।

सफल नहीं हो पाएंगी अब चालें घर के गद्दारों की,
जगह नहीं होगी नफरत की ना नफरतवाली भाषा की।
किरण दिखी है इक आशा की।

मुक्तिका - ये मिला मौका सुनहरा मत गँवाना साथियों




















रो चुका भारत बहुत अब है हँसाना साथियों।
ये मिला मौका सुनहरा मत गँवाना साथियों।

भ्रष्ट करते जा रहे हैं खोखला निशिदिन हमें,
आज हमको मिल इन्हें होगा मिटाना साथियों।

सरहदों पे बांकुरों के हाथ बांधे जा रहे,
उनके मन विश्वास भी होगा बढ़ाना साथियों।

कबतलक देखोगे कटते शीश बेटों के कहो,
काट के सिर तो हमें रिपु का गिराना साथियों।

वोट खातिर तुष्ट करना नीति है घातक बड़ी,
किन्तु ये धंधा रहा उनका पुराना साथियों।

"डर" दिखा भरमाएँगे वो फिर तुम्हें इसबार भी,
तुम किसी ऐसे छलावे में न आना साथियों।

रख चुके गिरवी हमारा मान वो परदेस में,
अब सबक इन द्रोहियों को है सिखाना साथियों।

शोभती मूरत नहीं कोई सिंहासन पे रखी,
आ गया है वक्त अब उसको हटाना साथियों।