शनिवार, 7 सितंबर 2013

चिड़िया रानी












चिड़िया रानी, चिड़िया रानी,
तुम तो निकली बड़ी सयानी।

मेरी बगिया में तुम आई,
एक पेड़पर जगह बनाई।
मिहनत से मुँह कभी न मोड़ा,
तिनका-तिनका तुमने जोड़ा।
एक घोंसला वहाँ बनाया,
जो हमसब के मन को भाया।
करी नहीं तुमने शैतानी,
तुम तो निकली बड़ी सयानी।

बच्चे आये वहाँ तुम्हारे,
छोटे-छोटे, प्यारे-प्यारे।
दाने उनको रोज खिलाती,
उड़ना भी तुम ही सिखलाती।
चूँ-चूँ, चूँ-चूँ बच्चे गाते।
चहक-चहक डालोंपर जाते।
तुमसे बगिया हुई सुहानी।
तुम तो निकली बड़ी सयानी।

3 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्कार आपकी यह रचना कल रविवार (08-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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    1. बहुत-बहुत आभार आपका प्रिय मित्र अरुन शर्मा जी

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