रविवार, 16 दिसंबर 2012

माधव की जय हो - घनाक्षरी





















श्याम छवि मन मोहे, संग-संग राधा सोहें,
मीठी बाँसुरी बजाते, माधव की जय हो।

कटि करधनी, शीश मुकुट, मयूर पंख,

दिव्य पीत वस्त्र धारे, माधव की जय हो।

नदिया किनारे वन, सुंदर कुसुम खिले,
धन्य-धन्य सभी हुए, माधव की जय हो।

मेरे प्यासे नैनों के भी, खुल गये भाग्य प्रभु,
आपका दरस मिला, माधव की जय हो॥  

1 टिप्पणी:

  1. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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