गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

घनाक्षरी

















भारती का शेर चला, फिर से दहाड़ने को,
गीदड़ों के दल बड़ी, मची हलचल है।

मोदी की ये जीत नहीं, जीत राष्ट्रवाद की है,
द्रोहियों के दिल होती, भारी खलबल है।

ट्रेलर दिखाया अभी, बाकी सारा सिनेमा है,
जोश लिए नवसेना, चली आजकल है।

मोदी जी बधाई ले लो, जय की मिठाई ले लो,
बाहर पटाखोंवाला, शोर पल-पल है॥

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