शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

श्रीराम वंदना





















जगत के रक्षक, पालनहार
कर दो भवसागर से पार,
हे मेरे स्वामी, तारनहार
करूँ प्रणाम मैं बारंबार।

तुम हो दानी, तुम हो दाता
पूजे जो तुमको, वो तर जाता
भय, भ्रम से मिलती मुक्ति
करता है जो तेरी भक्ति।
जो नहीं मिलता जन्मों में
मिल जाता तेरे चरणों में,
पाप नष्ट हो जायें सारे
मिल जायें जो दर्शन तुम्हारे।
हे मेरे मालिक, खेवनहार,
करूँ प्रणाम मैं बारंबार।

भाग्यविधाता, भाग्य जगा दे
निर्भय कर, डर दूर भगा दे,
बना मेरे हृदय को बसेरा
तुझको अर्पित जीवन मेरा।
करूँ किस विधि पूजा तेरी
क्षमा करो गलतियाँ मेरी,
तू परमात्मा, तू ही दर्पण
मेरा जीवन, तुझको अर्पण।
दे वर करूँ तेरी जय-जयकार,
करूँ प्रणाम मैं बारंबार।

(मेरे प्रभु श्रीराम की स्तुति)

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