गुरुवार, 8 नवंबर 2012

शिक्षक दिवस पर विशेष.......


गुरुओं से संसार है, गुरुवर शब्द विराट |
गुरु को पा के बन गया, चन्द्रगुप्त सम्राट ||

विद्या दो हे विद्यादाता | करूँ नमन नित शीश झुकाता ||
आन पड़ा हूँ शरण तिहारे | घने हुए मन के अँधियारे ||
दुखित ह्रदय नहीं दिखे उजाला | रोके रथ अज्ञान विशाला ||
कुछ न सूझे भरम है भारी | लागे मोहि मत गई मारी ||
दीन-हीन आया हूँ द्वारे | उर में आस की ज्योति धारे ||
ज्ञान मिलेगा यहाँ अपारा | निर्झरणी सम शीतल धारा ||
धार कलम की तेज बनाओ | कृपा करो सन्मार्ग दिखाओ ||
गुरुवर तुम ही हो उपकारी | लिये प्रेम का सागर भारी ||
भरो हमारे अन्दर ज्वाला | तेज लपट ऐसी विकराला ||
रूढ़िवादिता खाक करें हम | दुष्कर्मों का नाश करें हम ||
सिंह सम गरजें भरें हुंकारें | बनें शिवाजी छल को मारें ||
देश पुराने यश को पाए | दुनिया सादर शीश झुकाए ||
ऐसा वज्र बना दो हमको | ये संकल्प करा दो हमको ||
नवाचार की आँधी लाएँ | गुणी आपके शिष्य कहाएँ ||
मिले न कोई मुझ सम दूजा | मेरे कर्मों की हो पूजा ||
झूठ सदा नैनों में खटके | सत्य से कभी नहिं मन भटके ||
लावा ऐसा अन्दर फूटे | अन्यायी के सिर पर टूटे ||
किरपा इतनी चाहूँ तोसे | ज्ञानसागरों, विद्वजनों से ||
सिद्ध करो ये कारज मेरा | आ जाए इक नया सवेरा ||
किया भरोसा तुमपर जानो | विनती मोरी गुरुवर मानो ||

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