गुरुवार, 22 नवंबर 2012

श्रीराम भजन






















हे श्रीराम करुणा के सागर, वर दो मुझे रहूँ तुझे पाकर।
दो नयन मेरे प्यासे हैं कब से, अब तो दे दो दर्शन इन्हें आकर॥

जो भी दिल से तुझे पुकारे, पल में उनके तू काज सँवारे।
मेरे मन में भी आशा यही है, ओ मेरे स्वामी प्राणों से प्यारे॥
धन-वैभव का द्वार है तू, सम्पूर्ण जगत का सार है तू।
ज्ञान, भक्ति, यश देनेवाले, मेरे जीवन का आधार है तू॥
तेरे चरणों में रख डाला, मैंने अपना जीवन लाकर।
दो नयन मेरे प्यासे हैं कब से, अब तो दे दो दर्शन इन्हें आकर॥

पाप तले दबती जब सृष्टि, मुक्ति दिलाती तेरी कृपादृष्टि।
बड़े-बड़े राजे-महाराजे, तेरे आगे नतमस्तक नाचे॥
भक्त तेरे बजरंग बली, जिनके आगे न रावण की चली।
तेरे नाम का चमत्कार हुआ, पत्थरों के पुल से सागर पार हुआ॥
हे मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु, मैं "गौरव" तेरा चाकर।
दो नयन मेरे प्यासे हैं कब से, अब तो दे दो दर्शन इन्हें आकर॥

6 टिप्‍पणियां:

  1. जय श्री राम जय श्री राम...
    सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

    आप की ये रचना 19-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

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    1. स्वागत है आपका आदरणीय कुलदीप ठाकुर जी। बहुत-बहुत आभार....................

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  2. बहुत सुन्दर....बेहतरीन प्रस्तुति!!
    पधारें बेटियाँ ...

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    1. हार्दिक आभार आपका आदरणीया प्रतिभा वर्मा जी.........

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  3. बहुत खूब .बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.
    पधारें मेरी नबीनतम पोस्ट पर
    हालात कैसे आज बदले है.
    ग़ज़ल
    आखिर क्यों

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    1. आपका हार्दिक स्वागत है आदरणीय मदन मोहन सक्सेना जी। बहुत-बहुत धन्यवाद.............

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