गुरुवार, 8 नवंबर 2012

बंद - लघुकथा


महेश कोचिंग जाने के लिये तैयार हो रहा था कि तभी उसके पिता श्यामल बाबू ने उसे आवाज दी| "जी पिताजी" महेश ने उनके पास जा के पूछा| "हाँ महेश, सुनो मेरा तुम्हारी माँ के साथ झगडा हो गया है, वो कल उसने पकौड़े थोड़े फीके बनाये थे न, इसी बात पर| इसलिए आज सारा दिन तुम घर में बंद रहोगे और बाहर नहीं निकलोगे और यदि तुमने बाहर निकलने की कोशिश की, तो मैं तुम्हारे कमरे को पूरा तोड़-फोड़ दूंगा|" श्यामल बाबू इतना कह के चुप हो गये|

महेश ने हैरानी से अपने पिता को देखते हुए कहा - "पिताजी, यदि आपका झगडा माँ से हुआ है तो आप माँ से बात कीजिये| इसकी सजा आप मुझे क्यों दे रहे हैं? इसमें मेरी क्या गलती है?

श्यामल बाबू उसे अर्थपूर्ण दृष्टि से देखते हुए बोले - "महेश, कल तुमने अपने छात्रसंघ के अध्यक्ष की गिरफ्तारी के विरोध में अपने दोस्तों के साथ मिलकर पूरे शहर को बंद करा दिया था| तुम्हारा विरोध तो सरकार से था| तुमने सरकार से बात क्यों नहीं की? तुमने इसकी सजा आम जनता को क्यों दी? इसमें उनकी क्या गलती थी?"

1 टिप्पणी:

  1. ये कथा स्कूल के व्यस्थापक को बहुत पसंद आई .... इसे ले लूँ ?

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