शनिवार, 1 दिसंबर 2012

दो कुण्डलिया

(1)
सीमा लाँघो बैरियों, होना है जो ढेर।
ले भगवा तैयार है, भारत माँ का शेर॥
भारत माँ का शेर, बड़ा है ताकतवाला,
तीखे इसके दाँत, नैन सम धधके ज्वाला।
कह गौरव कविराय, बना देगा ये कीमा,
भागो ले के प्राण, भूल नहिं जाना सीमा॥

(2)
प्यारे भारत देश को, करो नमन हे वीर।
जयकारे का घोष कर, चलो थाम शमशीर॥
चलो थाम शमशीर, भूमि रण की है आगे,
पौरुष तेरा देख, सदा ही हैं रिपु भागे।
कह गौरव कविराय, वचन जो सच्चे सारे,
ठाड़ी तेरी जीत, पुष्प ले यश के प्यारे॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें