मंगलवार, 20 नवंबर 2012

राम-राम रट भैया





















रामनाम की महिमा भारी, राम ही कृष्ण-कन्हैया।
राम-राम रट भैया, तू राम-राम रट भैया॥

एक जगत का सार वही हैं। नौका वो, पतवार वही हैं॥
जीवन का आधार वही हैं। दाता वो, सरकार वही हैं॥
राम बसें जिस देश वहाँ सुख करता ता-ता-थैया।
राम-राम रट भैया, तू राम-राम रट भैया॥

नीर बिना है मछली जैसे। राम बिना है आत्मा वैसे॥
ज्यों सूरज से अम्बर चमके। त्यौं रघुवर से आत्मा दमके॥
रामनाम रस पी के झूमें पर्वत, तरु, ताल-तलैया।
राम-राम रट भैया, तू राम-राम रट भैया॥

जो राघव में चित्त रमाए। बजरंगी के मन को भाए॥
लगता है सारा जग अच्छा। खुद हनुमत करते हैं रक्षा॥
रामभजन गाओ सब मिल के, बन जाओ एक गवैया।
राम-राम रट भैया, तू राम-राम रट भैया॥

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