शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

भारतमाता की जय-जय हो


विजय मिली है, सदा विजय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

बेटों के उर लगन लगी है।
विश्वविजय की चाह जगी है॥
उनके बल का कभी न क्षय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

ले के दलबल निकल पड़े हैं।
कर अस्त्रों से भरे पड़े हैं॥
लगते ऐसे हुई प्रलय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

क्रोधानल से नैन लाल हैं।
नाहर सम नख-मुख विशाल हैं॥
देख जिसे भय को भी भय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

अरिसेना सब भाँप रही है।
थर-थर करती काँप रही है॥
अतिशीघ्र नवयुग का उदय हो।
भारतमाता की जय-जय हो॥

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