बुधवार, 3 अक्तूबर 2012

श्री गणेश आराधना


















प्रथम पूज्य भगवान मेरी
स्वीकार करो आराधना,
बहुत हुए पाप मुझसे
अब हो कोई अपराध ना|

तुम ही जग को पालनेवाले
पार्वती शंकर के दुलारे,
जो आया शरण में तुम्हारी
तुमने उसके काज सँवारे|
दर्शन भाग्यवान को होते
जो तुझे भजते, कभी न रोते,
बड़े अभागे जीव हैं वो
भूल तुझे जो रहते सोते|

जीवन के किसी मोड़ पर
छोड़ना मेरा साथ ना,
बहुत हुए पाप मुझसे
अब हो कोई अपराध ना|

सुखद सुहाना रूप तुम्हारा
मेरे नयनों को भाता है,
वर्णन विराट रूप का तेरे
कौन यहाँ कर पाता है|
कई रूप, कई नाम हैं तेरे
मूषक तेरी सवारी,
गणपति, गजानन है तू
तेरी कृपादृष्टि न्यारी|

अपने चरणों में रखना मुझे
स्वीकार करो ये प्रार्थना,
बहुत हुए पाप मुझसे
अब हो कोई अपराध ना|

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