शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

किनको तू पाल रही!

धरती से शशि कहता होगा
ये किनको तू पाल रही!

घाव नये जो रह-रह देकर
पहले तुझे रुलाते हैं
उन्हीं सिसकियों को फिर वे
"आया भूचाल" बताते हैं
देख रहा हूँ घुट-घुट के

माँ के आँचल के तले (कुंडलियाँ)





















1. प्यारा सा उद्यान

पथ पर मेरे यदि कहीं, पड़ता रेगिस्तान।
माँ ले आती ढूँढ के, प्यारा सा उद्यान॥

प्यारा सा उद्यान, संग उसके चलता है,
मेरा हर इक स्वप्न, जहाँ हँस-हँस पलता है।

देती जब वो हाँक, सारथी बन मेरा रथ,